" Community Portal to Communicate..."

Join your own community

About us

  • About us
  • History
  • Directory
  • All Sabha

About Chitragupta Parivar

          Chitragupta came into being after Brahma, the creator, having established the four varnas — Brahmin, Kshatriya, Vaishya and Shudra — ordained Dharamraj (also called Yamraj, the god of death) to keep record of the deeds — good and evil — of all life-forms born and yet to be born on earth, in the heavens above and in the lands below. Dharamraj, however, complained, "O Lord, how can I alone keep record of the deeds of the beings born into 84 lakh yonis (life-forms) in the three worlds?"


   Brahma went into meditation for 11, 000 years and when he opened his eyes he saw a man holding pen and ink-pot in his hands and a sword girdled to his waist. Brahma spoke: "Thou hast been created from my body (Kaya), therefore shall thy progeny be known as the Kayasthas. Thou hast been conceived in my mind (Chitra) and in secrecy (gupta), thy name shall also be Chitragupta." Brahma then enjoined him to dispense justice and punish those who violated the dharma (duties).


   Chitragupta is considered omnipresent and omniscient,[citation needed] believed to keep meticulous, complete and accurate records of the actions of all human beings from their birth till death. Chitragupta maintains record of the activities of all living beings, judges them based on good-deeds and misdoing, and decides, upon ones death, whether they will attain Nirvana, i.e., the completion of their life cycle and redemption from all worldly troubles or, receive punishment for their misdoing in another life form. We also know this in theosophical parlance as the "Akashic Records".

 

History of Chitragupta Parivar

कायस्थ की उत्पत्ति

          भीष्म पितामह ने पुलस्त्य मुनि से पूछा के हे महामुनि संसार में कायस्थ नाम से विख्यात मनुष्य किस वंश में उत्पन्न हुये हैं तथा किस वर्ण में कहे जाते हैं इसे में जानना चाहता हूँ | इस प्रकार के वचन कहकर भीष्म पितामह ने पुलस्त्य मुनि से इस पवित्र कथा को सुनने के इक्छा जाहिर की पुलस्त्य मुनि ने प्रसन्न होकर गंगा पुत्र भीष्म पितामह से कहा - हे गंगेय में कायस्थ उत्पत्ति की पवित्र कथा का वर्णन आपसे करता हूँ |

          जो इस जगत का पालन कर्ता है वही फिर नाश करेगा उस अब्यक्त शांत पुरुष लोक - पितामह ब्रम्हा ने जिस तरह पूर्व में इस संसार की कल्पना की है | वही वर्णन में कर रहा हूँ -

          मुख से ब्राम्हण बाहु से क्षत्रिय, जंघा से वैश्य, पैर से शूद्र, दो पाँव चार पाँव वाले पशु से लेकर समस्त सर्पादि जीवो का एक ही समय में चन्द्रमा, सूर्यादि ग्रहों को और बहुत से जीवो को उत्पन्न कर ब्रम्हा में सूर्य के समान तेजस्वी ज्येष्ठ पुत्र को बुलाकर कहा हे सुब्रत तुम यत्न  पूर्वक इस जगत की रक्षा करो | सृष्टि का पालन करने के लिये ज्येष्ठ पुत्र को आज्ञा देकर ब्रम्हा ने एकाग्रचित होकर दस हजार सौ वर्ष की समाधि लगाई अंत में विश्रांत चित्त हुये तदउपरांत उस ब्रम्हा के शरीर से बड़ी भुजाओ वाले श्याम वर्ण, कमलवत शंक तुल्य गर्दन, चक्रवत तेजस्वी, अति बुद्धिमान हाथ में कलम-दवात लिये तेजस्वी, अतिसुन्दर विचित्रांग, स्थिर नेत्र वाले, एक पुरुष अव्यक्त जन्मा जो ब्रम्हा के शरीर से उत्पन्न हुआ है | भीष्म उस अव्यक्त पुरुष को नीचे ऊपर देखकर ब्रम्हा जी ने समाधि छोडकर पूछा हे पुरुषोत्तम हमारे सामने स्थित आप कौन हैं | ब्रम्हा का यह वचन सुनकर वह पुरुष बोला हे विधे में आप ही के शरीर से उत्पन्न हुआ हूँ इसमें किंचित मात्र भी संदेह नहीं है | हे तात अब आप मेरा नाम करण करने योग्य हैं | सो करिये और मेरे योग्य कार्य भी कहिये | यह वाक्य सुनकर ब्रम्हा जी निज शरीर रज पुरुष से हंसकर प्रसन्न मुद्रा से बोले की मेरे शरीर से तुम उत्पन्न हुये हो इससे तुम्हारी कायस्थ संज्ञा है | और पृथ्वी पर चित्रगुप्त तुम्हारा नाम विख्यात होगा | हे वत्स धर्मराज की यमपुरी धर्माधर्म वितार के लिये तुम्हारा निश्चित निवास होगा | हे पुत्र अपने वर्ण में जो उचित धर्म है उसका विधि पूर्वक पालन करो और संतान उत्पन्न करो इस प्रकार ब्रम्हा जी भार युक्त वर को देकर अंतर्ध्यान हो गये श्री पुलस्त्य मुनि ने कहा है हे कुरूवंश के वृद्धि करने वाले भीष्म चित्रगुप्त से जो प्रजा उत्पन्न हुई है | उसका भी वर्णन करता हूँ सुनिये - चित्रगुप्त का प्रथम विवाह सूर्यनारायण के बड़े पुत्र श्राद्धादेव मुनि की कन्या नंदनी एरावती से हुआ इसके चार पुत्र उत्पन्न हुये प्रथम भानु जिनका नाम धर्मध्वज है जिसने श्रीवास्तव कायस्थ वंश बेल को जन्म दिया | द्वितीय पुत्र मतिमान जिनका नाम समदयालु है | जिसने सक्सेना वंश बेल को जन्म दिया | तृतीय पुत्र चारु जिनका नाम युगन्धर है | जिसने माथुर कायस्थ वंश बेल को जन्म दिया | चतुर्थ पुत्र सुचारू जिनका नाम धर्मयुज है जिसने गौंड कायस्थ वंश को जन्म दिया |

          चित्रगुप्त का दूसरा विवाह सुशर्मा ऋषि की कन्या शोभावती से हुआ इनसे आठ पुत्र हुये प्रथम पुत्र करुण जिनका नाम सुमति है जिसने कर्ण कायस्थ को जन्म दिया | द्वितीय पुत्र चित्रचारू जिनका नाम दामोदर है | जिसने निगम कायस्थ को जन्म दिया | तृतीय पुत्र जिनका नाम भानुप्रकाश है | जिसने भटनागर कायस्थ को जन्म दिया जिनका नाम युगन्धर है | अम्बष्ठ कायस्थ को जन्म दिया | पंचम पुत्र वीर्यवान जिनका नाम दीन दयालु है | जिसने आस्थाना कायस्थ को जन्म दिया शास्त्हम पुत्र जीतेंद्रीय जिनका नाम सदा नन्द है | जिसने कुलश्रेष्ट कायस्थ को जन्म दिया | अष्टम पुत्र विश्व्मानु जिनका नाम राघवराम है जिसने बाल्मीक कायस्थ को जन्म दिया है | हे महामुने चित्रगुप्त से उत्पन्न सभी पुत्र सभी शास्त्रों में निपुण उत्पन्न हुये धर्मा धर्म को जानने वाले महामुनि चित्रगुप्त ने सभी पुत्रो को पृथ्वी में भेजा और धर्म साधना के शिक्षा दी और कहा की तुम्हे देवताओं का पूजन पितरो का श्राद्ध तथा तर्पण, ब्राम्हणों का पालन पोषण और सदेव अभ्यागतो की यत्न पूर्वक श्रद्धा करनी चाहिये | हे पुत्र तीनो लोको के हित के लिये यत्न कर धर्म की कामना करके महर्षिमर्दिनी देवी का पूजन अवश्य करें | जो प्रकृति रूप माया चण्ड मुण्ड का नाश करने वाली तथा समस्त सिद्धियों को देने वाली है उसका पूजन करें जिसके प्रभाव से देवता लोग भी सिद्धियों को पाकर स्वर्ग लोक को गए और स्वर्ग के अधिकार को पाकर सदेव यज्ञ में भाग लेने वाले हुये | ऐसी  देवी के लिये तुम सब उत्तम मिष्ठानादि समर्पण करो जिससे वह चण्डिका देवताओं की भाँती तुमको भी सिद्ध देने वाली होवे और वैष्णव धर्म का अवलंबन कर मेरे वाक्य का प्रति पालन करो सभी पुत्रो को आज्ञा देकर चित्रगुप्त स्वर्ग लोक चले गये स्वर्ग जाकर चित्रगुप्त धर्मराज के अधिकार में स्थित हुये | हे भीष्म इस प्रकार चित्रगुप्त की उत्पत्ति मैंने आपसे कही |

       अब में उन लोगो का विचित्र इतिहास और चित्रगुप्त का जैसा प्रभाव उत्पन्न हुआ सो भी कहता हूँ सुनिये - श्री पुल्सत्य मुनि बोले की धर्माधर्म को जानते हुये नित्य पाप कर्म में रत पृथ्वी पर सौदास नामक राजा पैदा हुआ, उस पापी दुराचारी तथा धर्म कर्म से रहित राजा ने जिस प्रकार स्वर्ग में जाकर पुण्य के फल का भोग किया वह कथा सुना रहा हूँ | राजनीति को नहीं जानते हुये राजा ने अपने राज्य में ढिंडोरा पिटवा दिया की दान धर्म हवन श्राद्ध तर्पण अतिथियों का सत्कार जप नियम तथा तपस्या का साधन मेरे राज्य में कोई ना करे | देवी आदि की भक्ति में तत्पर वहां के निवासी ब्राम्हण लोग उसके राज्यों को छोड़ वहीँ से अन्य राज्यों में चले गये | जो रह गये यज्ञ हवन श्रद्धा तथा तर्पण कभी नहीं करते थे | हे गंगा पुत्र तबसे उसके राज्य में कोई भी यज्ञ हवन आदि पुण्य कर्म नहीं कर पता था | उस समय पुण्य उस राज्य से ही बाहर हो गया था | ब्राम्हण तथा अन्य वर्ण के लोग नाश करने लगे | अब आपको उस दुष्ट राजा का कर्म फल सुनाता हूँ हे भीष्म कार्तिक शुक्ल पक्ष की उत्तम तिथि द्वितीय को पवित्र होकर सभी कायस्थ चित्रगुप्त का पूजन करते थे | वे भक्ति भाव से परिपूर्ण होकर धूपदीपादि कर रहे थे देव योग से राजा सौदस भी घूमता हुआ वहां पंहुचा और पूजन देखकर पूछने लगा यह किसका पूजन कर रहे हो तब वे लोग बोले की राजन हम लोग चित्रगुप्त की शुभ पूजा कर रहे हैं | यह सुनकर राजा सौदस ने कहा की में भी चित्रगुप्त की पूजा करूँगा यह कहकर सौदस ने विधि पूर्वक स्नानादिकर मन से चित्रगुप्त की पूजा की, इस भक्तियुक्त पूजा करने से उसी क्षण राजा सौदस पाप रहित होकर स्वर्ग चला गया इस प्रकार चित्रगुप्त का प्रभावशाली इतिहास मैंने आपसे कहा | अब हे तृप श्रेष्ठ और क्या सुनने की आपकी इक्छा है | यह सुनकर भीष्म पितामह ने महर्षि पुलस्त्य मुनि से कहा हे विपेन्द्र किस विधि से वहां उस राजा सौदस ने चित्रगुप्त का पूजन किया जिसके प्रभाव से हे मुनि राजा सौदस स्वर्ग लोक को चला गया | श्री पुलस्त्य मुनि जी बोले - हे भीष्म चित्रगुप्त के पूजन कि संपूर्ण विधि में आप से कह रहा हूँ घृत से बने निवेध, ऋतुफल, चन्दन, पुष्प, रीप तथा अनेक प्रकार के निवेध, रेशमी और विचित्र वस्त्र से मेरी, शंख मृदंग, डिमडिम अनेक बाजे का भक्ति भाव से पतिपूर्ण होकर पूजन करें | हे विद्वान नवीन कलश लाकर जल से पतिपूर्ण करें उस पर शक्कर भरा कटोरा रखें और यतनपूर्वक पूजन कर ब्राम्हण को दान देवें | पूजन का मंत्र भी इस प्रकार पढ़े - दवात कलम और हाथ में खल्ली लेकर पृथ्वी में घूमने वाले हे चित्रगुप्त आपको नमस्कार हे चित्रगुप्त आप कायस्थ जाती में उत्पन्न होकर लेखकों को अक्षर प्रदान करते हैं | जिसको आपने लिखने की जीविका दी है | आप उनका पालन करते हैं | इसलिये मुझे भी शांति दीजिए | हे राजेन्द्र कुरूवंश को बढाने वाले हे भीष्म इन मंत्रो के संकल्प पूर्वक चित्रगुप्त का पूजन करना चाहिये | इस प्रकार राजा सौदस ने भक्ति भाव से पूजन कर निजराज्य का शाशन करता हुआ कुछ ही समय में मृत्यु को प्राप्त हुआ हे भारत यमदूत राजा सौदस को भयानक यमलोक में ले गये | चित्रगुप्त ने यमराज से पूछा की यह दुराचारी पाप कर्मरत सौदस राजा है | जिसने अपनी प्रजा से पापकर्म करवाया है | इस प्रकार धर्मराज से पूछे गये धर्माधर्म को जानने वाले महामुनि चित्रगुप्त जी हंसकर उस राजा के लिये धर्म विपाक युक्त शुभ वचन बोले हे धर्मराज

          यह राजा यद्दपि पाप कर्म करने वाला पृथ्वी में प्रसिद्ध है | और में आपकी प्रसन्नता से पृथ्वी में पूज्य हूँ हे स्वामिन आपने ही मुझे वह वर दिया है | आपका सदेव कल्याण हो आपको नमस्कार है | हे देव आप भली भाँती जानते है और मेरी भी मति है की यह राजा पापी है तब भी इस राजा ने भक्ति भाव से मेरी पूजा की है इससे में इससे प्रसन्न हूँ | हे इष्टदेव इस कारण यह राजा बैकुंठ लोक को जाए | चित्रगुप्त का यह वचन सुनकर यमराज ने राजा सौदस का बैकुंठ जाने की आज्ञा दी और राजा सौदस बैकुंठ लोक को चला गया श्री पुल्सत्य मुनि जी ने कहा हे भीष्म जो कोई सामान्य पुरुष या कायस्थ चित्रगुप्त जी की पूजा करेगा वह भी पाप से छूटकर परमगति को प्राप्त करेगा | हे गंगेय आप भी सर्व विधि से चित्रगुप्त की पूजा करिये | जिसकी पूजा करने से हे राजेन्द्र आप भी दुर्लभ लोक को प्राप्त करेंगे | पुलस्त्य मुनि के वचन सुनकर भीष्म जी ने भक्ति मन से चित्रगुप्त जी की पूजा की | कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीय को निज बहिन यमुना के घर धर्मराज ने भोजन किया था | इस कारण लोक में इसका नाम यमद्वितीया हुआ और यमुना ने यमराज को आयुष्य बढाने वाला वर दिया इस कारण इस तिथि में बहिन के हाथ से भोजन करने में धन आयुष्य आदि बढते है | इस तिथि में अपनी शक्ति के अनुसार भगिनी को दक्षिणा देवें और कायस्थ लोग बहिन के घर में चित्रगुप्त का पूजन करें चित्र विचित्र वर्ण के पुरुष रक्त चन्दन काले धतूरे के पुष्प और शामी के पत्ते से पूजन करें गुड़ मिश्रित लड्डू का नेवेध लगावें पूजन मंत्र भोग और अभोग किया हुआ अथवा ना किया हुआ प्रलय है, उस समय शंख  देने वाले हैं | चित्रगुप्त आपको नमस्कार है समुद्र मंथन के समय लक्ष्मी के साथ उत्पन्न होने वाले हे चित्रगुप्त हे माहाबाहो मेरी आयु को बढाओ का जप करें | इस प्रकार पूजन करने से प्रसन्न होकर चित्रगुप्त ने प्रसन्न होकर भीष्म को वर दिया की हे माहाबाहो मेरे प्रसाद से तुम्हारी मृत्यु ना होगी जिस समय तुम मृत्यु का स्मरण करोगे उसी समय तुम्हारी मृत्यु होगी यह वर देकर चित्रगुप्त स्वर्ग को चले गये जो बुद्धिमान पुरुष इस विधि से चित्रगुप्त की पूजा करेंगे उसके फल से वे इस लोक में अनेक प्रकार के बड़े बड़े सुख भोगकर अविनाशी विष्णु लोक को जायेंगे कायस्थों की उत्पादि का चित्रगुप्त की दिव्य कथा को जो श्रेष्ठ मनुष्य भक्ति मन से सुनेगे वे मनुष्य समस्त व्याधियों से छूटकर दीर्घायु होंगे और मरने पर जहाँ तपस्वी लोग जाते है | एसे विष्णु लोक को जायेंगे | 

 

Directory

 

(Name, Address, Profession, Phone, Mobile, Pager, e-mail, Website) 

Adholiya Ved Prakash 567/3, Anad Colony, Ukhari Road, Near Jain Tempil, Baldeobag, Jabalpur 2643064 (R) 2642835 (R) (Update 01.04.01)

#, Matrimonial ML-2 Ratan Nagar, Gupteshwar, Jabalpur e-mail # Ph-4010705 (Update 01.01.09)

Bhatnagar Arunika Dr., Prachi Bhatnagar Narsing Home, Ghamapur, Jabalpur 322020 (R) 322501 (O) 320439 (C) 321818 (H) (Update 01.04.01)

Decent Footwear 331/1, Karamchand Chowk Jabalpur 310454 (O) 345996 (R) (Update 01.04.01)

Kahre R. K. B-30, Ratan Nagar, Gupteshwar, Jabalpur Ph-517141 & Sagar 07582-31183

Khare STD PCO Damoh Naka, Damoh Road , Jabalpur 394001 (O) 394103 (O) 345945 (O) 340233 (Fax)

Karn Sandeep S/o Sh. Anand Lal Karn. R/o Prem Nagar Loni ( U.P.) Ph. 9250231872/9818112667 email karn.sandeep@yahoo.co.in (Update 23.02.08)

SAXENA ANIL KUMAR  J-48, JAIPRAKASH NAGAR, NEAR DHANI KI KUTIA, GCF COLONY, ADHARTAL, JABALPUR - 482004. (M.P.) emailengr.anil.kumar@gmail.com 09713716772  & 0761-4011364

Sinha vishal s/o shri,ashok kumar srivastava chhattarpur maherauli new delhi-30, Mob.09999271097, 01132915230 email : mlm.times@yahoo.co.in (Update 06.03.08)

Shrivastava A. P. Advocate, 958, Seth Sadan, 2nd, Floor, Near Jharokha Restaurant, Russl Chowk-1 2327911 (O) 2626610 (R) (Update 01.04.01)

Shrivastava Adarsh ML-2 Ratan Nagar, Gupteshwar, Jabalpur e-mail www.# Ph-4010705, 9981704810 (Update 01.01.09)

Shrivastava Ashok Mobile 9329843473 1318, Opp Sindhia Bhawan Sethi Nagar Gupteshwar Near MGM School Jabalpur (MP)
By Profession : Working In Reliance LIfe Insurance As an Executive Operations & Admin
my personal email is ashok.12484 relianceada.com (Update 29.01.09)

Shrivastava Jyotish ML-2 Ratan Nagar, Gupteshwar, Jabalpur e-mail  www.# Ph-4010705, 9981745325 (Update 01.01.09)

Shrivastava P. K. Near new market, Chungi choki, lalmati, Jabalpur 2692069 pp, 5012551pp (Update 01.04.01)

Shrivastava Pawan kumar ML-25/3, Ratan Nagar, Gupteshwar, Jabalpur 5016941 (Update 01.04.01)

Shrivastava Rajesh Ghazal Singe, 1/9, Fatehgarh Line , G.C.F.Estate, Jabalpur 2325628, 2327765 (Update 01.04.01)

Shrivastava S. K. 1891, Gupteshwar Jabalpur e-mail ss_diamond@rediffmail.com Ph-2421123 (R) (Update 01.04.01)

Shrivastava Shailendra 2443, Telegraph Gate No. 4, Wright Town, Jabalpur 2411927 (Update 01.04.01)

Shrivastava Vinod Kumar ML-56, Ratan Nagar, Gupteshwar, Jabalpur 4008102 e-mail vkshrivastava50@hotmail.com vkst2000@yahoo.co.in (Update 10.04.01)

 

 All Sabha

1. Rajasthan Kayastha Mahasabha, Jaipur, 2/139 Krishna Sheela, S.F.S. Mansarover,Jaipur  President : Arvind Kumar

2. Kulshreshtha Sabha, Lucknow

3. Mahakaushal Kayashta Parishad, Jabalpur

4. Bihar Pradesh Kayastha yuva Maneh,  Patna

5. Rashtriya Kayastha Mahaparishad President : Sh. Arvind Kumar  2/139 Krishna Sheela, S.F.S. Mansarover,  Jaipur  Ph : 2396046 M : 01412079520

6. Sh. Chitragupta Sabha, Nrarr, Moti  Nagar,Lucknow (U.P)  President : Shri B.D.Kulshreshtha

7.  All India Kulshreshtha Mahasabha National President : Shri Girish C.    Kulshrestha.

8.  Shri Chitragupta Navyuvak Samiti 2038, Mohini Sadan, Bhindo Ka Rasta, Chandpol Bazar, Jaipur 302001 Ph : 0141-2326342 President : J.K.Mathur – 2327492 Secretary : M.S.Mathur : 9414219601


9. Akhil Bhartiya Kayastha Marriage Buearu F-85/35, Tulsi Park, Tulsi Nagar, Bhopal –   462003 Ph : 2555575, 2575813

10.  Chitragupt Samaj Khagol Road, Aneesabad , Patna – 800002, Ph : 0612-2250962  Mr. S.K.Sinha

11.  Mathur Sabha www.mathursabhajaipur.org  President : Dr. U.B.Mathur A-25, Malviya Nagar, Jaipur  Ph : 0141-2753099

12.  Karnataka Kayastha Sabha  G.B.Mathur  203,2nd Floor, Kalpak Arcade, 19th Church Street Bangalore – 560001 Ph : 09448192186, 23302190

13.  Shri Chitragupt Poojan Samiti Off : 124/158, C Block, Sh. Chitragupt   Dharamshala Govind Nagar, Kanpur – 208011 President : Dr. K.C.Lal Ph: 0512-2612217,9415130159

14.  Akhil Bhartiya Kayastha Mahasabha 120, Dhar Road, Indore – 452002 President : Dr. R.C.Verma Ph : 64889

15.  Akhil Bhartiya Kayashta Mahasabha SA-15 A/133 K4A, Mavaiya, Saranath Varanasi President : Dr. (Mrs. Krishna Nigam 0542-2585702,09415722812

16.  Kayastha Sabha Alwar Opp Kendriya Bus Stand, Alwar (Raj) President : Harish C. Mathur

17.  Sh. Chitragupta Club Jaipur Kayastha Ki Bagichi, Kalyanji Ka Rastha, Indira Bazar, Jaipur President : Gopi Mohan Mathur

18.  Marudhar Mathur Samaj  Sewa Samiti 1323, Kisan Marg, Jaipur : Ph : 0141-  2761172,2502351 President : Deen Dayal Mathur

19.  Nandlal Kayashta Dharamshala, 3181, Radha Kisan Kayastha ki gali Kalyan ji ka rasta, Chandpol Bazar, Jaipur Presind : G.S.Mathur

20.  Chitransh Hitkarini Sabha 4-TA-, Jawahar Nagar, Jaipur. President : K.M.Sahai Ph : 2653690

21.   Mathur Hitkarini Samiti (Kotwala)  906, Vijay Bhawan, Khandar Ke Paste,  Moti Kotla Bazar, Jaipur.  Ph : 0141-2631980  President : Atal Bihair Mathur

22.  Kayastha Moksh Dham Vikas Samiti 2080, Badrinath ji ke Chowk, Khazane Walon Ka Rastha Jaipur, Ph: 9414043784 President : Chandra Prakash Dutt,

23.  Sh Chitragupt Samita 1-D-2, Lalita Shastri Colony, Shastri Nagar, Jaipur Ph  : 0141-2306443 President : Shri. G.C.Pradhan

24.  Prabhu Bhawan Trust Committee Kayastha Mohalla, Purani Mandi, Ajmer  (Rej) President : Shibhag Narayan Mathur Ph : 2627884

25.  Chitragupt Samiti Ajmer Rajasthan Shri Shyam Narayan Mathur Ph : 2621987

26.  Sh. Chitragupta Trust, Sh Chitragupta Market, Kalyan ji Ka Rasta Chnadpol Bazar, Jaipur , Ph : 0141-2312376 President : Sunder Swarup Mathur

27.  Sh. Chitragupta Samiti 1A52 Mahaveer Nagar Extention Project  Kota, 344004  Ph: 0744-2471847  President : Gishi Kant Bhatnagar

28.  Shri. Chitragupt Kalyan Sangathan 7/106, Circular Road, Shahadara Delhi-110032, Ph : 22306148 Ph : Shri Surendra Mohan Lal Bhatnagar

29.  Chitragupta Ashram Brig Ghat, Garhmukteshwar

30.  Akhil Bhartiya Kayastha Mahasabha 5605, Kolhapur, Kamla  Nagar, Delhi – 7 President : Shri : M.L.Srivastava

31.  Akhil Bhartiya Kayastha Maharashta 9018, Sheeshmahal Bhopal-462001 President : Kailash Sarang

32.  Sh: Kayastha Sabha Indore133, M.G.A., Road (Rajbora. Indore

33.  Shri Chitragupta Samaj Samiti 4/724, Vikas Nagar, Lucknow U.P. President : Baldau ji Srivastava  0522-  2673707

34.  Shri. Chitragupta Sabha 558, Rajendra Nagar, Lucknow Shri : Shiv Lal Khare

35.  Shri Chitragupta Sabha, Bakshipur Gorakhpur. U.P President : Sh. Harinandan Srivastava

36. Kayastha Samaj Gang aNilay, T.I.T. Road,  Ratnam. (M.P.)  Sh : Pramod Bhartiya

37. Chitragupt Pratikshalaya Kathmandu Nepal President : Dr. Virender K. Mullik

38. Chitragupta Mahila Jagriti Mandal President : Smt. Shobha Nigam

39. Chitragupta Kayastha Sabha Shastri Nagar, Shahjahanpur

40. Chitransh Karamchari Kalyan Samiti224-B/2, Prem Nagar, Bareilly U.P. 2340050581-2541284

41. Shri Chitragupt Vanooj Sabha Preetam   Nagar, 9B, dhoomanganj,Allahabad0532-2632203G.Sc. : Pankaj Srivastav

42. Kayastha Chetna Manch, RampurHr Subhash Nande – Patroon

43. Shri. Chitraputra Kalyan Samiti 120/230, Lajpat Nagar,KanpurPresident : K.D.Kumar0512-2285507,2680923

44. Chitransh Sewa Samiti, 14 A, O Block, Yashoda Nagar  Kanpur : Ph : 0512 2630536  Dr. Girjesh Lal Srivastava

45. Shri Chitragupta Parivar 117/288, O Block Geeta Nagar Kanpur,  208025  MR. V.P.Srivastava,Gen Sec  0512-2501959

46. Jan Hitkari Kayastha Club 736, ‘K’ Block Kidvai Nagar  Kanpur – 203011  President : 0512-2600096,2608300

47. Kendriya Chitragupta Samita, 117/376, Geeta NAgar KAnpur – 208025 President : Ajit K. Pradhan

48. Shri Chitragupta Sabha 75-B,Vakil Road, New Mandi  Muzzaffarnagar, U.P.  President : Mr. Vipul Bhatnagar  09837155807

49. Madhya Pradesh Yuva Kayastha Sangathan Vishnu Bhawan, Patna P.O.MAhadeva   (Jawahar Nagar) Satna M.P.

50. Shri Chitragupta Sewa Sangh Royal Colony, Gaya 823001 Gen. Sec : Sunil Kumar Sinha 2433830,2227090 9835260549

51. Kayastha Krantikari Vichaar Manch A/51, Housing Colony Kankar Bagh, Patna  800021  President : Arun Kr. Sinha  Ph : 0612-2350462/9835494868

52. Chitransh Bihar  Krishna Bhawan, Dakshini Mandiri  Patna : 800001  0612-2537831

53. Bhagmara Anchal Chitragupt Mahaparivar Katragarh, Dhanbad, Jharkhand

54. Akhil Bhrartiya Kayastha Mahasabha (Chitransha International) 204,Vijay Apartment, 1589, Napur Town, Jabalpur – 482001

55. Sh. Chitragupt Mahasabha Sthai Samiti 542, Ratanlal Nagar, Kanpur-208022 Chairman : Surendra Nath Chitranshi

56. Chitransh International (Nepal) Sinha Sadan Kathmandu Nepal President : Shri Sushil Kumar Sinha

57. Shri Chitragupta Parishad 10 Amar Vihar, Sikendra  Agra. Gen Sec : G.S.Saxena

58. District Chitragupta Kalyan Samiti –  35, Premnagar, Etah – 207001  Ph : 05742-234493  President : Shri Mahendra Kumar  Saxena    Ph : 231387

59. Chitragupta Kayasth Mandir Nyas Guna, M.P. President – Shri Gopal Saxena

60. Shivpuri Kayastha Samaj Jatyara, The : Mohari Shivpuri (M.P.)    President : Sh Narendra Srivastava

61. Kayastha Sabha Sanehalak Samiti Ameshwar Temple Complex, Nai Abadi Mandsaur (U.P) President : Shri Brij Mangal Singh Kulshestra

62. Kayastha Sabha 15, Industrial Area II  Ram Darbar, Chandigarh  Mr : K.M.Nigam

63. Kayastha Cehtna Manch A-7, Ramnath Colony Civil Linies, Rampur (U.P)

65. Chitragupta Mitra Mandal 13-D,Sahyadri, Anushakti Nagar, Mumbai  – 400088 Dr .D.N.Srivastava, Ph: 022-25558863,25511961

66. Srivastava Kayastha Yuvasangh 249/50,Chandni Chowk fatehpuri,  Delhi – 110006  Subhash Chandra Srivastava  Ph: 2398435

67. Srivastava Kayastha Panchayat Jhandewalan, Delhi - 52

68. National Kayastha Forum CD-24F,DDA Flats Haro Nagar, Delhi – 64 Sh H.C.Verma (Chairman) Ph : 27855842,28122289

69. Sri Chitragupta Navyuvak Samiti, Jaipur 2308,Mohani Sadan, Bhindho ka rasta, Chandpoul Bazar, Jaipur-302001

70. Akhil bhartiye Chitransh Sewa Sangam Sector-H, Aliganj, Lucknow

71. Shri Chitragupta Pariwar  (Regd.) North West Delhi (600 Kayastha Families Live members) Founder & Chairman- S.B.L Srivastava Coordination - DANI Civil Services Retd. C 430,saraswati vihar-Nd-34  Res.-  27032896


72. Akhil bhartiya Kayastha Ekta Abhiyan   Manch 184/5, Ravindra Pali,  P.o. Narayan Nagar,  Lucknow. 226016

73. Shree Chitragupt Samaj Welfare Association, Navi Mumbai Rajesh K Shreevastava Secretory 8286201111 (Update 28.03.2012) www.facebook.com/chitraguptsamaj

Add a New Sabha Details